Recents in Beach

header ads
 हकीक़त भी यहीं है और है फ़साना भी,  मुश्किल है किसी का साथ निभाना भी।
 सड़क कितनी भी साफ क्यों न हो,  लेकिन धूल हो ही जाती है।
रिश्तो के बाजार में रिश्तो को कुछ  इस तरह सजाया जाता है,
जिन्दगी एक रात है, जिस में ना जाने कितने ख्वाब हैं,   जो मिल गया वो अपना है,
हर रात मैं भी आपके पास उजाला हो हर कोई आपका
समंदर न सही पर एक नदी तो होनी चाहिए, तेरे शहर में ज़िंदगी कहीं तो होनी चाहिए।
ये जो है हुक्म मेरे पास न आये कोई,   इसलिए रूठ रहे हैं कि मनाये कोई।
 तमन्ना छोड़ देते हैं...